Goat Farming - A Good Option To Adopt As Income Source

बकरीपालन - कम खर्च, अच्छा मुनाफा

बकरीपालन.... एक ऐसा व्यवसाय जिसके जरिए छोटे और भूमिहीन किसान कम खर्च में अच्छा मुनाफा ले सकते हैं.... कम खर्च इसलिए क्योंकि इन्हें ना तो ज्यादा भोजन की जरूरतर होती है.... ना ज्यादा रखरखाव की.....ये किसी भी तरह के वातारण में आसानी से रह पाती है..... इसलिए इस व्यवसाय में किसान के लिए नुकसान की गुंजाइश भी ना के बराबर है..... और सबसे बड़ी बात.... छोटे मझोले किसानों भी फसले जब प्राकृति आपदा से बर्बाद होती है... तो यही बकरियां उनकी आजीविका का सहारा बनती हैं.... आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि विश्व में सबसे ज्यादा बकरियां भारत में हैं...... करीब साढ़े 13 करोड़ बकरियां हैं.. यानि विश्वभर की बकरियों की 16 प्रतिशत सिर्फ भारत में हैं...... और भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बकरीपालक देश है...

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हमारे देश में बकरियों की 23 विकसित नस्लें है और करीब 15 से 20 अविकसित नस्लें हैं..... जो देश के अलग अलग हिस्सों में रहने वाले ग्रामीणो द्वारा पाली जाती हैं...... देशभर की बकरियों से करीब 1.23 हजार मीट्रिक टन दूध मिलता है..... यानि कुल दूध उत्पादन का 3 प्रतिशत..... इनसे 370 हजार मीट्रिक टन माँस का उत्पादन होता है..... जो कि कुल माँस उत्पादन का 40 प्रतिशत है.....

भारत में बकरियों की जो 23 विकसित नस्लें हैं उन्हें उत्पादन के आधार पर तीन भागों में बांटा गया है..... दुधारू नस्लें..... ऊन उत्पादक नस्लें और मांस उत्पादक नस्लें.....दुधारू नस्ल में हैं.... जमुनापारी, सूरती, जखराना, बरबरी और बीटल.... जबकि मांस उत्पादन के लिहाज से अच्छी मानी जाती हैं ब्लेक बंगाल, उस्मानाबादी, मारवाडी, मेहसाना, संगमनेरी, कच्छी और सिरोही..... वहीं ऊन उत्पादन के लिए कश्मीरी, चाँगथाँग, गद्दी और चेगू नस्लें हैं..... जिनसे पश्मीना मिलती है.....

बात इऩके खाने की करें..... तो बकरी एक ऐसा पशु है.... जो कम से कम और खराब से खराब चारे में अपना पेट भर लेती है...... लेकिन पशुपालक ये देखते हुए बकरी का आहार निर्धारित करें कि उसकी उम्र क्या है....वो गर्भवती तो नहीं.... और आप उसे किस उद्धेश्य से पाल रहे हैं.... और जानकार की सलाह से उसी आधार पर आप उसकी खुराक तय करें..... बकरियां कई प्रकार के विषाण जनित रोगों की चपेट में भी जाती है.... इसलिए लापरवाही कतई ना बरतें.... और समय पर पशुचिकित्सक की सलाह लेकर पूर इलाज कराएं.... इसके आलावा फसल बीमा की तरह ही पशु बीमा भी जरूर कराएं..... इनकी बीमा योजना पंचायतों द्वारा निकाली जाती है...... जिसमें बकरियों की अचानक मृत्यु होने पर पशुपालक को पंशु के बीमे का भुगतान चैक द्वारा महीनेभर के भीतर ही कर दिया जाता है.... 

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तो दोस्तों ये थी बकरीपालन से जुड़ी कुछ खास जरूरी बतें...... अगर आप इस व्यवसाय को करना चाहते हैं... तो बकरीपालन कर लाभ ले सकते हैं..... क्योंकि इसका आकार भले छोटा है..... लेकिन मुनाफे बहुत हैं..... तभी तो बकरी को गरीब की गाय कहा गया है..... इसलिए इसमें कोई दोराय नहीं कि बकरी पालन, मिश्रित खेती में एक साधारण किसान का फायदेमंद रोजगार है..... यानि खेती से अलग एक एक्ट्रा इनकम..... जो आय को दोगुना करने में अहम भूमिका निभा सकती है....

इन्हीं तमाम बातों पर गौर करते हुए इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चर डेवलेपमेंट ने बकरीपालन के व्यवसाय को और बड़े स्तर पर करने की सिफारिश की है..... और कहा है कि इससे देश में किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी..... तो कीजिए बकरी पालन.... और साल 2022 तक कृषि की दोगुनी आय के लक्ष्य में अपनी भागिदारी दीजिए.....

 

 

 

 

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